स्वयं को मूल्यहीन कदापि न समझें ।।

स्वयं को मूल्यहीन कदापि न समझें ।। Apne Aap Ko Kabhi Mulyahin Na Samajhen.

जय श्रीमन्नारायण,

मित्रों, कई लोग कई मौकों पर अपने आपको मूल्यहीन समझने लगते हैं । ऐसे में किसी भी तुलना से दूर रहते हुए खुद पर भरोसा रखकर आगे बढ़ना ही आपका मंत्र होना चाहिए ।।

क्या वाकई मैं कुछ अच्छा काम नहीं कर रहा हूं ? क्या मैं अपनी पूरी क्षमता से काम कर पा रहा हूं ? क्या मैं इतना अच्छा हूं कि लोग मुझसे प्यार करें ?।।

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ऐसे खयाल बहुत से लोगों के मन में उमड़ते रहते हैं । अपने प्रियजनों और परिजनों की नजर में और अपने कामकाजी जीवन में अपने महत्व को लेकर अक्सर लोग कुछ ज्यादा ही चिंतित होते हैं ।।

ऐसी चिंता अधिकतर उन्हें अपनी क्षमता से भी कम होने का एहसास कराती है । ऐसा समय सभी के जीवन में कभी न कभी जरूर आता है जबकि व्यक्ति को अपनी क्षमताओं पर संदेह होने लगता है ।।

व्यक्ति अपनी योग्यता पर वह खुद ही प्रश्नचिह्न लगाने लगता है । जिंदगी के ऐसे लम्हों में जब आप खुद को कम आंकें तो अपने आत्मविश्वास को संभालने की बहुत ज्यादा जरूरत होती है ।।

हमारे महापुरुषों ने इसी तरफ इशारा करते हुए कहा है- सभी बातों में सबसे महत्वपूर्ण है, कि कभी यह न सोचें कि आपका कोई महत्व नहीं है ।।

किसी भी व्यक्ति को ऐसा नहीं सोचना चाहिए । मेरा मानना है, कि जीवन में मिलने वाले लोग खुद को पहचानने में आपकी मदद ही करेंगे ।।

संतों का कहना है, कि जिन लोगों को देखकर हम खुद को हीन समझते हैं, वे तो खुद को समझने में हमारी मदद भर करते हैं । अपने पर संदेह से उबरने में कुछ कदम आपकी मदद कर सकते हैं ।।

Swami Dhananjay Maharaj

नारायण सभी का नित्य कल्याण करें । सभी सदा खुश एवं प्रशन्न रहें ।।

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जय जय श्री राधे ।।
जय श्रीमन्नारायण ।।

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