जीवन में अपने व्यवहार को किसी के लिये भी अर्थात सभी के लिये स्पष्ट रखें ।।

जीवन में अपने व्यवहार को किसी के लिये भी अर्थात सभी के लिये स्पष्ट रखें ।। Apne Vyavahar Ko Kisi Ke Liye Bhi Spasht Rakhen.

जय श्रीमन्नारायण,

मित्रों, जीवन में अगर हमारी पहली कोशिश अच्छा बने रहने के बजाय सच कहने की होगी तो हमें जीवन में मुश्किल परिस्थितियों का सामना नहीं करना पड़ेगा ।।

तब हमें अनावश्यक तनाव और अप्रिय स्थितियों से नहीं जूझना पड़ेगा । तब किसी से मुंह नहीं चुराना पड़ेगा और कोई बहाना भी नहीं बनाना पड़ेगा ।।

Bhagwat Katha Vachak Swami ji

अगर किसी व्यक्ति का काम आप समय पर नहीं कर सकते हैं तो उसे स्पष्ट रूप से “ना” कह देना ही आपके लिए बेहतर होगा ।।

मित्रों, जीवन में सभी चाहते हैं, कि वे अपने तमाम संबंधों में अच्छे बने रहें । इसलिए कई बार वे सच नहीं बोल पाते हैं । लेकिन आज सच के पक्ष में नहीं खड़ा होने के कारण हम अपने मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाते हैं ।।

भले ही हमारे निकटस्थ लोगों को हमारी बात अप्रिय और कडवी लगे । लेकिन यथास्थिति में बने रहना हमारी पहली शर्त होनी चाहिये । जीवन में जो लोग बहुत मधुर व्यवहार करते हैं उनसे बहुत सावधान होने की सलाह के पीछे भी यही वजह है, कि उनके मन का सच हमारे सामने कभी उजागर नहीं हो पाता है ।।

bhagwat Katha,  Shrimad bhagwat Katha,  Shreemad bhagwat Katha, free bhagwat Katha, bhagwat Katha By Swami Dhananjay Maharaj, bhagwat Katha By Swami Shri Dhananjay Ji Maharaj, bhagwat Katha By Swami Ji Maharaj, Bhagwat Katha tirupati Balaji Mandir Swami Ji Maharaj

मित्रों, यह बड़ी विसंगति है, कि हम उन्हीं लोगों से प्रसन्न रहते हैं जो हमारे साथ मधुर व्यवहार करते हैं । जो स्पष्ट संवाद करते हैं, अधिकतर वे लोग हमें नहीं सुहाते हैं ।।

हमें अच्छे नहीं सच्चे लोगों की पहचान करना सीखना चाहिए । वे लोग जो थोड़ा कड़वा बोलते हैं, उनकी कही बात में और व्यवहार में दोहराव नहीं होता है । वे दुहरा चरित्र नहीं जीते और सबसे ज्यादा भले इंसान होते हैं ।।

हमारी कोशिश दूसरों को भली लगने वाली बातें करके अपनी अच्छी छवि गढ़ने की नहीं होना चाहिए । बल्कि हमें तो वही कहना चाहिए जो सच है ।।

हमें यह निर्णय सामने वाले पर छोड़ देना चाहिए कि वह हमारी सीधी-सच्ची बात को ठीक समझता है या नहीं । जब हम इस तरह के व्यवहार को जिएंगे तो हमारे मन में किसी भी तरह की दुविधा और बोझ नहीं होगा ।।

bhagwat Katha, Shrimad bhagwat Katha, Shreemad bhagwat Katha, free bhagwat Katha, bhagwat Katha By Swami Dhananjay Maharaj, bhagwat Katha By Swami Shri Dhananjay Ji Maharaj, bhagwat Katha By Swami Ji Maharaj

कई बार दो व्यक्ति किसी रिश्ते में एक अंत तक पहुंच जाते हैं । ऐसी स्थिति में जहां वे एक दूसरे के साथ आनंदित नहीं होते, उनके बीच अच्छे पल नहीं बीतते ।।

लेकिन वे एक दूसरे के प्रति खुलकर अपनी भावनाएं व्यक्त नहीं करते । क्योंकि उन्हें अपनी छवि की चिंता होती है । ऐसे में कोई भी रिश्ता लंबे समय तक चलता रहे तो उसमें भीतर ही भीतर विस्फोटक स्थिति बनती रहती है ।।

जो लोग इस तरह की स्थितियों में होते हैं वे खीझ, पीड़ा और तनाव झेलते रहते हैं । जब रिश्तों में सच नहीं रहता तो आपसी बहस और रोष की स्थिति बनती है ।।

फिर रिश्ते बोझ बन जाते हैं और उन्हें झेलना या उनमें बने रहना आपकी बहुत-सी ऊर्जा सोख लेता है । ऐसे में जरूरी है, कि हम छवि की चिंता करे बिना सच कहें ।।

bhagwat Katha, Shrimad bhagwat Katha, Shreemad bhagwat Katha, free bhagwat Katha, bhagwat Katha By Swami Dhananjay Maharaj, bhagwat Katha By Swami Shri Dhananjay Ji Maharaj, bhagwat Katha By Swami Ji Maharaj, Bhagwat Katha tirupati Balaji Mandir Swami Ji Maharaj,

नारायण सभी का नित्य कल्याण करें । सभी सदा खुश एवं प्रशन्न रहें ।।

Sansthanam:   Swami Ji:   Swami Ji Blog:   Sansthanam Blog:    facebook Page:   My YouTube Channel:

जय जय श्री राधे ।।
जय श्रीमन्नारायण ।।

Sevashram Sansthan Silvassa

Contact to "LOK KALYAN MISSION CHARITABLE TRUST" to organize Shreemad Bhagwat Katha, Free Bhagwat Katha, Satsang. in your area. you can also book online.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *