भगवान से विनती अथवा माँगना कहाँ तक उचित है ।।

भगवान से विनती अथवा माँगना कहाँ तक उचित है ।। bhagwan se mangana uchit ya anuchit

भगवान से विनती – परमात्मा से हमेशा सद्गुण ग्रहण करने हेतु ही विनती की जानी चाहिए । प्रार्थना के साथ उसे आचरण में भी लाएं नहीं तो प्रार्थना फलीभूत नहीं होती है ।।

अगर केवल प्रार्थना भर ही की जाए तथा आचरण में नहीं लाया जाए, तो प्रार्थना का शुभ फल प्राप्त नहीं होता है । यदि आध्यात्म की ओर अग्रसर होना हो तो भूलकर भी ईश्वर से धन-दौलत, सोने-चांदी या गाड़ी-बंगले की अपेक्षा नहीं करनी चाहिए ।।

परन्तु सांसारिक वासनाओं के पूर्ति की बात करें तो ईश्वर से इनकी प्राप्ति हेतु भी धन-दौलत, सोने-चांदी या गाड़ी-बंगले की अपेक्षा होनी चाहिए । क्योंकि इश्वर भी चाहता है, की ”रक्षापेक्षामुपेक्षते” इस सूत्र के अनुसार यह उचित है ।।

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Sevashram Sansthan Silvassa

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