ब्राह्मण कोई भी बन सकता है, लेकिन कैसे?।।

ब्राह्मण कोई भी बन सकता है, लेकिन कैसे?।। Brahman Koi Bhi Ban Sakata Hai.

जय श्रीमन्नारायण,

मित्रों, आज के समय में कुछ लोग ब्राह्मणों का विरोध करने में अपनी बड़ाई समझते हैं । मेरा तो मानना है, कि ब्राह्मण तो वैसे कोई भी बन सकता है । जी हाँ बिलकुल! और आज प्रत्यक्ष में इस बात का प्रमाण भी उपलब्ध है ।।

कहा गया है, कि “प्रत्यक्षम् किं प्रमाणं” अर्थात प्रत्यक्ष के लिए किसी दुसरे प्रमाण की क्या आवश्यकता है ? तो आप आज के हमारे इस समाज में स्वयं देख लीजिये । रामदेव बाबा, निर्मल बाबा, तथाकथित राधे माँ, इत्यादि इनके जैसे लाखों की संख्या में हैं ।।

अगर आपको भी ब्राह्मण बनना है, तो बनों कोई नहीं रोकेगा अर्थात क्यों रोकेगा ? इनको कौन रोक रहा है । बल्कि इनकी तो बड़े-बड़े ब्राह्मणों के घरों में बड़ी-बड़ी तस्वीरें लगी हुई हैं ।।

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परन्तु आपको ब्राह्मण बनना हो तो सर्वप्रथम इस बात का ध्यान रखें कि आपको संतुष्टि के साथ तपस्वी जीवन व्यतीत करना होगा । अगर ऐसा है तो ही इस विद्या को पढ़ो और ब्राह्मण बनो ।।

मित्रों, कई बार लोगों को ये समझ ही नहीं आता की उनको क्या चाहिए और क्या नहीं चाहिए ? इसी वजह से लोग धन की इच्छा से भी आध्यात्मिक साधना में लग जाते हैं, जो गलत मार्ग पर आगे चलते-चलते भटक जाते है ।।

फिर ऐसे लोग हमारे धर्म की भी बदनामी करवाकर स्वयं भी डूब जाते हैं । कई बार मैं देखता हूँ, तो मुझे लगभग ये आभास होता है, कि ये इन्सान धन का लोभी है और बातें बड़ी से बड़ी साधन-साधना की करता है ।।

मुझे ये नहीं पता मुझे ऐसा क्यों आभास होता है । हो सकता है, मेरे विचार ही अच्छे न हों । पर एक बात तो परम सत्य है और उसे सभी को स्वीकारना ही होगा की तत्त्वज्ञान लोकभोग्य के लिए नहीं होता ।।

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कभी-कभी देखता हूँ, लोग टीवी पर बैठकर पानी-पूरी खाने की सलाह देते हैं । साथ ही कहते हैं, की ये ज्ञान हमारे अन्दर से प्रकट हुआ है । इसी से तुम्हारा कल्याण हो जायेगा । आज के चलचित्रों में तो धर्म की ऊँची-से-ऊँची बातें मजाक करने के लिए प्रयुक्त किया जाता है ।।

आज की हमारी युवा पीढ़ी उसको बिना समझे हँसकर उड़ा देती है । तत्त्वज्ञान को लोकभोग्य की वस्तु बनाकर रखना हो तो स्वाभाविक है कई बार लोग मनमाने हो ही जाते हैं ।।

अक्स़र हमारे गुरूजी कहा करते थे, कि बेटा अगर धन कमाना हो तो नौकरी करनेवाली विद्या अथवा व्यापार करनेवाली बानिये वाली विद्या पढ़ो । क्योंकि ब्राह्मण बनना अर्थात् संतुष्टि के साथ तपस्वी जीवन व्यतीत करना हो तो ही इस विद्या को पढ़ो ।।

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सेवा करने वाला सामने वाले का अगर गुण और दोष देखेगा तो सेवा क्या ख़ाक करेगा । हम नि:स्वार्थ भाव से अपना कर्म करते जाएँ तो फल देनेवाला भगवान है, अवश्य ही देगा ।।

ऐसे में अगर हमें ही जब भगवान पर भरोसा नहीं होगा तो फिर हम क्या ख़ाक दूसरों को भरोसा दिलवाएंगे । इसलिए हमें यज्ञार्थ कर्म करने की आवश्यकता है और वो भी नि:स्वार्थ । अपना कर्त्तव्य कर्म करते जाओ देनेवाला उपर बैठा है ।।

Shrimad Bhagwat Katha

नारायण सभी का नित्य कल्याण करें । सभी सदा खुश एवं प्रशन्न रहें ।।

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जय जय श्री राधे ।।
जय श्रीमन्नारायण ।।

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