अथ श्री नारायण कवचम् अर्थ सहितम् ।।

अथ श्री नारायण कवचम् अर्थ सहितम् ।। Shri Narayan Kavacham – Arth Sahitam. ॐ हरिर्विदध्यान्मम सर्वरक्षां न्यस्ताड़् घ्रिपद्मः पतगेन्द्रपृष्ठे ।

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अथ श्री भरत अग्रज अष्टकम् ।।

अथ श्री भरत अग्रज अष्टकम् ।। Shri Bharat Agraja Ashtakam हे जानकीश वरसायकचापधारिन् हे विश्वनाथ रघुनायक देव-देव। हे राजराज जनपालक

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अथ श्रीमदानन्दरामायणांतर्गत श्री भरतकवचम् ।।

अथ श्रीमदानन्दरामायणांतर्गत श्री भरतकवचम् ।। Shri Bharata Kavacham अगस्तिरुवाच- अथः परं भरतस्य कवचं ते वदाम्यहं । सर्वपापहरं पुण्यं सदा श्रीरामभक्तिदं

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अथ सन्तान गोपाल स्तोत्रम् – मूल मन्त्र सहितम् ।।

अथ सन्तान गोपाल स्तोत्रम् – मूल मन्त्र सहितम् ।। santan gopala stotra mul mantra sahita मित्रों, आज मैं आपलोगों को

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श्री राघवेन्द्र अष्टकम् ।।

 श्री राघवेन्द्र अष्टकम् ।। Shri Raghavendra Ashtakam अच्युतं राघवं जानकी वल्लभं कोशलाधीश्वरं रामचन्द्रं हरिम् । नित्यधामाधिपं सद्गुणाम्भोनिधिं सर्वलोकेश्वरं राघवेन्द्रं भजे ॥

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अथ अच्युताष्टकम् ।। Achyutashtakam.

अच्युतं केशवं रामनारायणं कृष्णदामोदरं वासुदेवं हरिम् । श्रीधरं माधवं गोपिकावल्लभं जानकीनायकं रामचन्द्रं भजे ॥१॥ अच्युतं केशवं सत्यभामाधवं माधवं श्रीधरं राधिकाराधितम्

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भज गोविंदम, भज गोविंदम, भज गोविंदम मूढ़मते ।।

भज गोविंदम, भज गोविंदम, भज गोविंदम मूढ़मते ।। भज गोविंदम,भज गोविंदम,भज गोविंदम मूढ़मते ।। संप्रप्ते सन्निहिते काले,नहि नहि सक्षति डुकृञ्करणे

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गजेन्द्रमोक्ष स्तोत्र ।।

श्रीशुक उवाच:- ” एवं व्यवसितो बुद्ध्या समाधाय मनो ह्रदि । जजाप परमं जाप्यं प्राक्जन्मन्यनुशिक्षितम् ॥ ” १ ॥ गजेन्द्र उवाच:-

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अथ श्रीनन्दकुमाराष्टकम्

सुन्दरगोपालम् उरवनमालं नयनविशालं दुःखहरम् ॥ ॥वृन्दावनचन्द्रमानन्दकन्दं परमानन्दं धरणिधरम्॥ ॥वल्लभघनश्यामं पूर्णकामम् अत्यभिरामं प्रीतिकरम्॥ ॥भज नन्दकुमारं सर्वसुखसारं तत्त्वविचारं ब्रह्मपरम्॥ १॥ ॥सुन्दरवारिजवदनं निर्जितमदनम्

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श्रीमद्भागवतान्तर्गतं वेणुगीतम् ।।

श्रीमद्भागवतान्तर्गतं वेणुगीतम् ।। श्रीशुक उवाच:- इत्थं शरत्स्वच्छजलं पद्माकरसुगन्धिना । न्यविशद्वायुना वातं स गोगोपालकोऽच्युतः ।।१।। अर्थ:- श्री शुकदेवजी कहते हैं – परीक्षित !

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