पद्मा (परिवर्तिनी) एकादशी व्रत विधि एवं कथा सहित हिन्दी में ।।

पद्मा (परिवर्तिनी) एकादशी व्रत विधि एवं कथा सहित हिन्दी में ।। Padma Ekadashi Vrat Vidhi And Katha in Hindi.

जय श्रीमन्नारायण,

मित्रों, एक बार कि बात है, कि सम्राट युधिष्ठिर ने भगवान से पूछा! भगवन्! भाद्रपद शुक्ल एकादशी का क्या नाम है? इसकी विधि तथा इसका माहात्म्य कृपा करके बतायें । तब भगवान श्रीकृष्ण ने कहा कि यह व्रत जो अतुलनीय पुण्य यहाँ तक कि स्वर्ग और मोक्ष तक को देने वाली तथा समस्त पापों का नाश करने वाली, इस उत्तम पद्मा एकादशी का माहात्म्य मैं आपसे कहता हूं आप ध्यानपूर्वक सुनिए ।।

भागवत कथा वाचक स्वामी श्री धनञ्जय जी महाराज तिरुपति बालाजी मंदिर, Bhagwat katha, Bhagwat Katha Bhajan, bhagwat Katha By Swami Dhananjay Ji Maharaj, bhagwat Katha By Swami Dhananjay Maharaj, bhagwat Katha By Swami Ji Maharaj, bhagwat katha swami ji, bhagwat katha vachak Swami Dhananjay Ji Maharaj tirupati Balaji Mandir

यह पद्मा अथवा परिवर्तिनी एकादशी को जयंती एकादशी एवं वामन एकादशी भी कहते हैं । इस व्रत को करने से वाजपेय यज्ञ का फल मिलता है । बड़े से बड़े पापियों के पापों का नाश करने के लिए इससे बढ़कर कोई अन्य उपाय नहीं । जो मनुष्य इस एकादशी के दिन भगवान के वामन रूप की पूजा करता है, वह तीनों लोकों में पूज्य होते हैं । अत: मोक्ष की इच्छा रखने वाले मनुष्य इस व्रत को अवश्य करें ।।

जो कमलनयन भगवान का कमल से पूजन करते हैं, वे अवश्य भगवान के समीप जाते हैं । जिसने भाद्रपद शुक्ल एकादशी को व्रत और पूजन किया, उसने ब्रह्मा, विष्णु सहित तीनों लोकों का पूजन कर लिया । अत: इस एकादशी के व्रत को अवश्य करना चाहिए । मान्यतानुसार इस दिन भगवान करवट लेते हैं, इसलिए इसको परिवर्तिनी एकादशी भी कहते हैं ।।

bhagwat Katha, Shrimad bhagwat Katha, Shreemad bhagwat Katha, free bhagwat Katha, bhagwat Katha By Swami Dhananjay Maharaj, bhagwat Katha By Swami Shri Dhananjay Ji Maharaj, bhagwat Katha By Swami Ji Maharaj,

भगवान के इस वचन को सुनकर सम्राट युधिष्ठिर बोले कि भगवन्! मुझे संदेह इस बात का हो रहा है, कि भगवान किस प्रकार सोते और करवट लेते हैं । भगवान ने किस तरह राजा बलि को बांधा और वामन रूप में क्या-क्या लीलाएं कीं? साथ ही यह भी बतायें कि चातुर्मास के व्रत की क्या विधि है तथा आपके शयन करने पर मनुष्य का क्या कर्तव्य है । सो आप मुझसे विस्तार से बताइए ।।

भगवान श्रीकृष्ण कहने लगे कि हे राजन! अब आप समस्त पापों को नष्ट करने वाली कथा सुनें । त्रेतायुग में बलि नामक एक दैत्य था । वह मेरा परम भक्त था । विविध प्रकार के वेद सूक्तों से मेरा पूजन किया करता था और नित्य ही ब्राह्मणों का पूजन तथा यज्ञ के आयोजन करता था । लेकिन इंद्र से द्वेष के कारण उसने इंद्रलोक तथा सभी देवताओं को जीत लिया ।।

bhagwat Katha, Shrimad bhagwat Katha, Shreemad bhagwat Katha, free bhagwat Katha, bhagwat Katha By Swami Dhananjay Maharaj, bhagwat Katha By Swami Shri Dhananjay Ji Maharaj, bhagwat Katha By Swami Ji Maharaj,

इस कारण सभी देवता एकत्र होकर सोच-विचारकर भगवान के पास गए । बृहस्पति सहित इंद्रादिक देवता प्रभु के निकट जाकर और नतमस्तक होकर वेद मंत्रों द्वारा भगवान का पूजन और स्तुति करने लगे । अत: भगवान ने वामन रूप धारण करके पांचवां अवतार लिया और फिर अत्यंत तेजस्वी रूप से राजा बलि को जीत लिया ।।

इतनी बातें सुनकर राजा युधिष्ठिर बोले कि हे जनार्दन! भगवान ने वामन रूप धारण करके उस महाबली दैत्य को किस प्रकार जीता? भगवान श्रीकृष्ण कहने लगे- वामन रूपधारी ब्रह्मचारी भगवान ने राजा बलि से तीन पग भूमि की याचना की और कहा- ये मुझको तीन लोकों के समान है और हे राजन यह आपको अवश्य ही देनी होगी ।।

राजा बलि ने इसे तुच्छ याचना समझकर तीन पग भूमि देने का संकल्प किया और भगवान ने अपने त्रिविक्रम रूप को बढ़ाकर यहां तक कि भूलोक में पद, भुवर्लोक में जंघा, स्वर्गलोक में कमर, मह:लोक में पेट, जनलोक में हृदय, यमलोक में कंठ की स्थापना कर सत्यलोक में मुख, उसके ऊपर मस्तक स्थापित कर दिया ।।

Swami Dhananjay Maharaj

सूर्य, चंद्रमा आदि सब ग्रह गण, योग, नक्षत्र, इंद्रादिक देवता और शेष आदि सब नागगणों ने विविध प्रकार से वेद सूक्तों से प्रार्थना की । तब भगवान ने राजा बलि का हाथ पकड़कर कहा कि हे राजन! एक पद से पृथ्वी, दूसरे से स्वर्गलोक पूर्ण हो गए । अब तीसरा पग कहां रखूं?

तब राजा बलि ने अपना सिर झुका लिया और भगवान ने अपना पैर उसके मस्तक पर रख दिया । इसके बाद भक्त बलि पाताल को चले गये । फिर उसकी प्रार्थना और विनम्रता को देखकर भगवान ने कहा कि हे बलि! मैं सदैव तुम्हारे निकट ही रहूंगा । विरोचन पुत्र बलि से कहने पर भाद्रपद शुक्ल एकादशी के दिन बलि के आश्रम में भगवान की मूर्ति स्थापित हुई ।।

इसी प्रकार दूसरी घटना क्षीरसागर में शेषनाग के पृष्ठ पर हुई थी! हे राजन! इस एकादशी को भगवान शयन करते हुए करवट लेते हैं, इसलिए तीनों लोकों के स्वामी भगवान विष्णु का उस दिन पूजन करना चाहिए । इस दिन तांबा, चांदी, चावल और दही का दान करना उचित होता है । रात्रि को जागरण अवश्य करना चाहिए ।।

bhagwat Katha, Shrimad bhagwat Katha, Shreemad bhagwat Katha, free bhagwat Katha, bhagwat Katha By Swami Dhananjay Maharaj, bhagwat Katha By Swami Shri Dhananjay Ji Maharaj, bhagwat Katha By Swami Ji Maharaj,

जो विधिपूर्वक इस एकादशी का व्रत करते हैं, वे समस्त पापों से मुक्त होकर स्वर्ग में जाकर चंद्रमा के समान प्रकाशित होते हैं और यश पाते हैं । जो इस पापनाशक कथा को पढ़ते या सुनते हैं, उनको हजार अश्वमेध यज्ञ करने का फल प्राप्त होता है ।।

नारायण सभी का नित्य कल्याण करें । सभी सदा खुश एवं प्रशन्न रहें ।।

Sansthanam:   Swami Ji:   Swami Ji Blog:   Sansthanam Blog:    facebook Page:   My YouTube Channel:

जय जय श्री राधे ।।
जय श्रीमन्नारायण ।।

Sevashram Sansthan Silvassa

Contact to "LOK KALYAN MISSION CHARITABLE TRUST" to organize Shreemad Bhagwat Katha, Free Bhagwat Katha, Satsang. in your area. you can also book online.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.