राम राज्य का असली अभिप्राय समझें ।।

रघुवंश महाकाव्य के राजा दिलीप का वर्णन करते हुए महाकवि कालिदास कहते हैं कि – जिस प्रकार सूर्य, समुद्र से जल लेता है, कि उसे वर्षा- काल में अनन्त-गुना अधिक लौटा सके, उसी तरह राजा दिलीप, प्रजा से ‘कर’ लेते थे, ताकि वे कई गुना अधिक कर के प्रजा को लौटा सकें ।।

 

राम राज्य का असली अभिप्राय समझें ।। Ram Rajya Ka Abhipraya Samajhen.

 

जय श्रीमन्नारायण,

वागर्थाविव संपृक्तौ वागर्थप्रतिपत्तये ।
जगतः पितरौ वन्दे पार्वतीपरमेश्वरौ ॥

वाणी और अर्थ के समान मिले हुए जगत के माता-पिता, शिव-पार्वती की, वाणी और अर्थ की प्राप्ति के लिए मैं (कालिदास) वन्दना करता हूँ ।।

रघुवंश महाकाव्य के राजा दिलीप का वर्णन करते हुए महाकवि कालिदास कहते हैं कि – जिस प्रकार सूर्य, समुद्र से जल लेता है, कि उसे वर्षा- काल में अनन्त-गुना अधिक लौटा सके, उसी तरह राजा दिलीप, प्रजा से ‘कर’ लेते थे, ताकि वे कई गुना अधिक कर के प्रजा को लौटा सकें ।।

महाराज दशरथ के पिता राजा अज के राज्य में प्रत्येक मनुष्य यह सोचता था, कि वह राजा का मित्र है । हमारी संस्कृति में आज भी आदर्श राज्य को राम राज्य कहने की प्रथा है ।।

राजा, प्रजा का पिता समान माना जाता है, क्योंकि वह प्रजा की शिक्षा की व्यवस्था करता है, उसकी रक्षा करता है और उसका भरण-पोषण करता है ।।

 

नमामी रामम् रघुवंश नाथम् ।।
मंगलकामनाओं के साथ…

Ram Rajya Ka Abhipraya Samajhen.

।। सदा सत्संग करें । सदाचारी और शाकाहारी बनें ।।

।। सभी जीवों की रक्षा करें ।।

।। नारायण सभी का नित्य कल्याण करें ।।

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।। नमों नारायण ।।

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