संसार में हँसी का पात्र कौन ?।।

संसार में हँसी का पात्र कौन ?।। Who is the character of ridicule in the world तर्कविहीनो वैद्यः लक्षण हीनश्च

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भगवान से विनती अथवा माँगना कहाँ तक उचित है ।।

भगवान से विनती अथवा माँगना कहाँ तक उचित है ।। bhagwan se mangana uchit ya anuchit भगवान से विनती – परमात्मा

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अथ श्रीदया शतकम् ॥ Shri daya shatakam

 अथ श्रीदया शतकम् ॥  Shri daya shatakam श्रीमान्वेङ्कटनाथार्यः कवितार्किककेसरी । वेदान्ताचार्यवर्यो मे सन्निधत्तां सदा हृदि ॥ श्रीः । प्रपद्ये तं

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अथ श्रीदेवताह्वान प्रकारः (गद्यम्) ।। Devatahvana prakarah

अथ श्रीदेवताह्वान प्रकारः (गद्यम्) ।।  Devatahvana prakarah  सर्वकर्मकारयितृभारतीरमणमुख्यप्राणान्तर्गत- अनन्तगुणगणपरिपूर्ण-अनन्तावतारात्मक-अनन्तजीवान्तर्यामि बिम्बनामक परमात्मन्, मया प्रतिक्षणे मनोवाक्कायकर्मभिः क्रियमाणान् अनन्तापराधानगणय्य मदर्थमस्मद्गुर्वन्तर्गतभारतीरमणमुख्यप्राणेनानन्तवेदोक्तप्रकारेण क्रियमाणप्रार्थनोपरि दृष्टिं दत्वा

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अथ श्रीअञ्जन शैलनाथ स्तोत्रम् ।। Shri Anjana shailanatha stotram

अथ श्रीअञ्जन शैलनाथ स्तोत्रम् ।। Shri Anjana shailanatha stotram पुलकिनि भुजमध्ये पूजयन्तं पुरन्ध्रीं भुवननयनपुण्यं पूरिताशेषकामम् । पुनरपि वृषशैले फुल्लनीलोत्पलाभं पुरुषमनुभवेयं

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क्या अपराध हमारा जो इतना तुम सताते हो ।।

क्या अपराध हमारा जो इतना तुम सताते हो ।। Kyon itana satate ho mohan जय श्रीमन्नारायण,          

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राजनीतिक दुष्चक्र में वैदिक संस्कृति, पर कैसे ? 

राजनीतिक दुष्चक्र में वैदिक संस्कृति, पर कैसे ?  Rajniti ka Duschkra. जय श्रीमन्नारायण, मित्रों, हमने सुना है, कि नेपाल की

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अथ अच्युताष्टकम् ।। Achyutashtakam.

अच्युतं केशवं रामनारायणं कृष्णदामोदरं वासुदेवं हरिम् । श्रीधरं माधवं गोपिकावल्लभं जानकीनायकं रामचन्द्रं भजे ॥१॥ अच्युतं केशवं सत्यभामाधवं माधवं श्रीधरं राधिकाराधितम्

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लाभ से लोभ और लोभ से पाप बढ़ता है-लाभेन वर्धते लोभः ।।

जय श्रीमन्नारायण, लाभ से लोभ और लोभ से पाप बढ़ता है । पाप के बढ़ने से धरती रसातल मे चली

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मनुष्य के वासना की उम्र ।।

एक दिन सम्राट अकबर ने दरबार में अपने मंत्रियों से पूछा कि मनुष्य में काम-वासना कब तक रहती है। कुछ

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