राम राज्य का असली अभिप्राय समझें ।।

रघुवंश महाकाव्य के राजा दिलीप का वर्णन करते हुए महाकवि कालिदास कहते हैं कि – जिस प्रकार सूर्य, समुद्र से

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ईश्वर ही एकमात्र सत्य है ।।

ऐश्वर्यस्य समग्रस्य वीर्यस्य यशसः श्रियः । ज्ञानवैराग्ययोश्चैव षण्णां भग इतीरणा ॥ अर्थ:- समग्र ऐश्वर्य, शौर्य, यश, श्री, ज्ञान, और वैराग्य

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ज्ञान से बड़ा कुछ नहीं!!

अल्पाक्षरमसंदिग्धं सारवद्विश्वतो मुखम् । अस्तोभमनवद्यं च सूत्रं सूत्रविदो विदुः ।। अर्थ:- अल्पाक्षरता, असंदिग्धता, साररुप, सामान्य सिद्धांत, निरर्थक शब्दों का अभाव

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गुरु भगवान का रूप होता है ।।

गुरु भगवान का रूप होता है ।। Teacher is equal to God 2 निवर्तयत्यन्यजनं प्रमादतः, स्वयं च निष्पापपथे प्रवर्तते । गुणाति

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गुरु भगवान का रूप होता है ।।

किमत्र बहुनोक्तेन शास्त्रकोटि शतेन च । दुर्लभा चित्त विश्रान्तिः विना गुरुकृपां परम् ।। अर्थ:- बहुत कहने से क्या ? करोडों

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गुरु भगवान का रूप होता है ।।

आचरणशील व्यक्ति की सहायता परमात्मा नित्य ।। पुरुषकारमनुवर्तते दैवम् ।। अर्थ:- दैव (परमात्मा) भी पौरुष (पुरुषार्थियों या चरित्रवानों)) का ही अनुसरण

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दान के छः अंग ।। Six parts of donation.

दान के छः अंग ।।  Six parts of donation दाता प्रतिगृहीता च शुद्धिर्देयं च धर्मयुक् । देशकालौ च दानानामङ्गन्येतानि षड्

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सादा जीवन उच्च विचार ।। Sada Jivan Uchcha Vichar.

सादा जीवन उच्च विचार ।। Sada Jivan Uchcha Vichar. संसारे मानुष्यं सारं मानुष्ये च कौलीन्यम् । कौलिन्ये धर्मित्वं धर्मित्वे चापि सदयत्वम्

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सत्य से सबकुछ सम्भव है ।।

सत्य से सबकुछ सम्भव है ।। satya se sabkuchh sambhav hai. तस्याग्निर्जलमर्णवः स्थलमरिर्मित्रं सुराः किंकराः, कान्तारं नगरं गिरिर्गृहमहिर्माल्यं मृगारिर्मृगः । पातालं

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संसार में हँसी का पात्र कौन ?।।

संसार में हँसी का पात्र कौन ?।। Who is the character of ridicule in the world तर्कविहीनो वैद्यः लक्षण हीनश्च

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