गुरु भगवान का रूप होता है ।।

आचरणशील व्यक्ति की सहायता परमात्मा नित्य ।। पुरुषकारमनुवर्तते दैवम् ।। अर्थ:- दैव (परमात्मा) भी पौरुष (पुरुषार्थियों या चरित्रवानों)) का ही अनुसरण

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भज गोविंदम, भज गोविंदम, भज गोविंदम मूढ़मते ।।

भज गोविंदम, भज गोविंदम, भज गोविंदम मूढ़मते ।। भज गोविंदम,भज गोविंदम,भज गोविंदम मूढ़मते ।। संप्रप्ते सन्निहिते काले,नहि नहि सक्षति डुकृञ्करणे

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