ब्रह्मादि देवों द्वारा गोलोक धाम का दर्शन – गोलोक खण्ड : अध्याय 2 – गर्ग संहिता ।।

ब्रह्मादि देवों द्वारा गोलोक धाम का दर्शन – गोलोक खण्ड : अध्याय 2 – गर्ग संहिता ।। devo dwara golok dham

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ज्ञान से बड़ा कुछ नहीं!!

अल्पाक्षरमसंदिग्धं सारवद्विश्वतो मुखम् । अस्तोभमनवद्यं च सूत्रं सूत्रविदो विदुः ।। अर्थ:- अल्पाक्षरता, असंदिग्धता, साररुप, सामान्य सिद्धांत, निरर्थक शब्दों का अभाव

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गुरु भगवान का रूप होता है ।।

गुरु भगवान का रूप होता है ।। Teacher is equal to God गुरुर्ब्रह्मा ग्रुरुर्विष्णुः गुरुर्देवो महेश्वरः । गुरुः साक्षात् परं

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गुरु भगवान का रूप होता है ।।

गुरु भगवान का रूप होता है ।। Teacher is equal to God 2 निवर्तयत्यन्यजनं प्रमादतः, स्वयं च निष्पापपथे प्रवर्तते । गुणाति

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गुरु भगवान का रूप होता है ।।

किमत्र बहुनोक्तेन शास्त्रकोटि शतेन च । दुर्लभा चित्त विश्रान्तिः विना गुरुकृपां परम् ।। अर्थ:- बहुत कहने से क्या ? करोडों

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अथ सन्तान गोपाल स्तोत्रम् – मूल मन्त्र सहितम् ।।

अथ सन्तान गोपाल स्तोत्रम् – मूल मन्त्र सहितम् ।। santan gopala stotra mul mantra sahita मित्रों, आज मैं आपलोगों को

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अथ श्रीअञ्जन शैलनाथ स्तोत्रम् ।। Shri Anjana shailanatha stotram

अथ श्रीअञ्जन शैलनाथ स्तोत्रम् ।। Shri Anjana shailanatha stotram पुलकिनि भुजमध्ये पूजयन्तं पुरन्ध्रीं भुवननयनपुण्यं पूरिताशेषकामम् । पुनरपि वृषशैले फुल्लनीलोत्पलाभं पुरुषमनुभवेयं

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क्या अपराध हमारा जो इतना तुम सताते हो ।।

क्या अपराध हमारा जो इतना तुम सताते हो ।। Kyon itana satate ho mohan जय श्रीमन्नारायण,          

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धर्म तथा धार्मिक मनुष्य के दस लक्षण !!

नमों नारायणाय, मनुस्मृति में धर्म के दस लक्षणों का वर्णन है, जिन्हे आचरण में उतारने वाला व्यक्ति ही धार्मिक कहलाने

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अष्टलक्ष्मी स्तोत्रम् ।।

जय श्रीमन्नारायण, ।। अष्टलक्ष्मी स्तोत्रम् ।। आदिलक्ष्मी – सुमनसवन्दित सुन्दरि माधवि, चन्द्र सहोदरि हेममये ।। मुनिगणमण्डित मोक्षप्रदायिनि, मञ्जुळभाषिणि वेदनुते ।।

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