ब्रह्मादि देवों द्वारा गोलोक धाम का दर्शन – गोलोक खण्ड : अध्याय 2 – गर्ग संहिता ।।

ब्रह्मादि देवों द्वारा गोलोक धाम का दर्शन – गोलोक खण्ड : अध्याय 2 – गर्ग संहिता ।। devo dwara golok dham

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गुरु भगवान का रूप होता है ।।

गुरु भगवान का रूप होता है ।।Teacher is equal to God 4 विना गुरुभ्यो गुणनीरधिभ्यो, जानाति तत्त्वं न विचक्षणोऽपि ।

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अथ सन्तान गोपाल स्तोत्रम् – मूल मन्त्र सहितम् ।।

अथ सन्तान गोपाल स्तोत्रम् – मूल मन्त्र सहितम् ।। santan gopala stotra mul mantra sahita मित्रों, आज मैं आपलोगों को

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श्री कनकधारा स्तोत्रम् – अर्थ सहितम् ।।

श्री कनकधारा स्तोत्रम् – अर्थ सहितम् ।। shri-kanakdhara-stotram. अंगंहरे: पुलकभूषण माश्रयन्ती भृगांगनैव मुकुलाभरणं तमालम। अंगीकृताखिल विभूतिरपांगलीला मांगल्यदास्तु मम मंगलदेवताया:।।1।। अर्थ:-

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अध्यात्मरामायणमाहात्म्यम् ब्रह्माण्डपुराणे।।

रामं विश्वमयं वन्दे रामं वन्दे रघूद्वहम् । रामं विप्रवरं वन्दे रामं श्यामाग्रजं भजे ॥ यस्य वागंशुतश्च्युतं रम्यं रामायणामृतम् । शैलजासेवितं

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चतुर्विंशतिनाम प्रतिपादक चूर्णिका

चतुर्विंशतिनाम प्रतिपादक चूर्णिका ॥ ॥ श्री भद्राचल रामदास कृत चतुर्विंशतिनाम प्रतिपादक चूर्णिका ॥ श्रीमदखिलाण्ड कोटि ब्रह्माण्ड भाण्ड दाण्डोपदण्ड मण्डल सान्दोत्दीपित

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भरताग्रज श्रीराम अष्टकम् ।।

भरताग्रज श्रीराम अष्टकम् ।। हे जानकीश वरसायकचापधारिन् हे विश्वनाथ रघुनायक देव-देव। हे राजराज जनपालक धर्मपाल त्रयस्व नाथ भरताग्रज दीनबन्धो॥१॥ हे

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अथ श्रीरघुनाथ अष्टकम् ।।

अथ श्रीरघुनाथ अष्टकम् ।। शुनासीराधीशैरवनितलज्ञप्तीडितगुणं प्रकृत्याऽजं जातं तपनकुलचण्डांशुमपरम् । सिते वृद्धिं ताराधिपतिमिव यन्तं निजगृहे ससीतं सानन्दं प्रणत रघुनाथं सुरनुतम् ॥

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अथ श्रीराघव अष्टकम् ।।

राघवं करुणाकरं मुनि-सेवितं सुर-वन्दितं जानकीवदनारविन्द-दिवाकरं गुणभाजनम् । वालिसूनु-हितैषिणं हनुमत्प्रियं कमलेक्षणं यातुधान-भयंकरं प्रणमामि राघवकुञ्जरम् ॥ १॥ मैथिलीकुच-भूषणामल-नीलमौक्तिकमीश्वरं रावणानुजपालनं रघुपुङ्गवं मम दैवतम्

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अथ श्रीकृष्ण द्वादश नाम स्तोत्रम् ।।

अथ श्रीकृष्ण द्वादश नाम स्तोत्रम् ।। श्रीकृष्ण उवाच । किं ते नामसहस्रेण विज्ञातेन तवाऽर्जुन । तानि नामानि विज्ञाय नरः पापैः

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