गुरु भगवान का रूप होता है ।।

आचरणशील व्यक्ति की सहायता परमात्मा नित्य ।। पुरुषकारमनुवर्तते दैवम् ।। अर्थ:- दैव (परमात्मा) भी पौरुष (पुरुषार्थियों या चरित्रवानों)) का ही अनुसरण

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सत्य से सबकुछ सम्भव है ।।

सत्य से सबकुछ सम्भव है ।। satya se sabkuchh sambhav hai. तस्याग्निर्जलमर्णवः स्थलमरिर्मित्रं सुराः किंकराः, कान्तारं नगरं गिरिर्गृहमहिर्माल्यं मृगारिर्मृगः । पातालं

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