गुरु भगवान का रूप होता है ।।

गुरु भगवान का रूप होता है ।। Teacher is equal to God 2

निवर्तयत्यन्यजनं प्रमादतः, स्वयं च निष्पापपथे प्रवर्तते ।
गुणाति तत्त्वं हितमिच्छुरंगिनाम् , शिवार्थिनां यः स गुरुर्निगद्यते ।।

 

अर्थ:- जो दूसरों को प्रमाद करने से रोकते हैं, स्वयं निष्पाप रास्ते से चलते हैं, हित और कल्याण की कामना रखनेवाले को तत्त्वबोध करते हैं, उन्हें गुरु कहा जाता हैं ।।

धर्मज्ञो धर्मकर्ता च सदा धर्मपरायणः ।
तत्त्वेभ्यः सर्वशास्त्रार्थादेशको गुरुरुच्यते ।।

 

अर्थ:- धर्म को जाननेवाले, धर्म के मुताबिक आचरण करनेवाले, धर्मपरायण, और सब शास्त्रों में से तत्त्वों का उपदेश करनेवाले गुरु कहे जाते हैं ।।

Teacher is equal to God

Sevashram Sansthan Silvassa

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