गुरु भगवान का रूप होता है ।।

गुरुरात्मवतां शास्ता शास्ता राजा दुरात्मनाम् ।
यथा प्रच्छन्नपापानां शास्ता वैवस्वतो यमः ।।

अर्थ:- आत्मवान् लोगों का शासन गुरु करते हैं; दृष्टों का शासन राजा करता है; और गुप्तरुप से पापाचरण करनेवालों का शासन यम करता है (अर्थात् अनुशासन तो अनिवार्य ही है) ।।

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दुर्लभं त्रयमेवैतत् देवानुग्रहहेतुकम् ।
मनुष्यत्वं मुमुक्षुत्वं महापुरुष संश्रयः ।।

अर्थ:- इस संसार में मनुष्यत्व (मानव शरीर मिलना) उसमें भी मुमुक्षत्व (मुमुक्षु = धर्म का अनुगामी होना) और महापुरुषों (गुरु) का मिलना � ईश्वरानुग्रह का सबसे बड़ा प्रमाण है अर्थात् ये तीन मिलना अति ही दुर्लभ है ।।

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