संसार में हँसी का पात्र कौन ?।।

संसार में हँसी का पात्र कौन ?।। Who is the character of ridicule in the world

तर्कविहीनो वैद्यः लक्षण हीनश्च पण्डितो लोके ।
भावविहीनो धर्मो नूनं हस्यन्ते त्रीण्यपि ।।

 

अर्थ:- तर्क विहीन वैद्य, लक्षण विहीन पंडित, और भाव रहित धर्म – ये अवश्य हि जगत में हँसी के पात्र बनते हैं ।।

 

 अस्थिरं जीवितं लोके ह्यस्थिरे धनयौवने ।
अस्थिराः पुत्रदाराश्च धर्मः कीर्तिर्द्वयं स्थिरम् ।।

 

अर्थ:- इस अस्थिर जीवन/संसार में धन, यौवन, पुत्र-पत्नी इत्यादि सब अस्थिर है । केवल धर्म, और कीर्ति ये दो हि बातें स्थिर है ।।

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